
उत्तराखंड में 200 से अधिक पत्रकारों की मान्यता निरस्त किए जाने का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। नियम-300 के तहत प्रस्तुत सूचना को विधानसभा अध्यक्ष Ritu Khanduri Bhushan ने स्वीकृति दे दी है। इस निर्णय के बाद यह मुद्दा औपचारिक रूप से विधानसभा में चर्चा के लिए सामने आ गया है।
यह मामला राज्य के कई वरिष्ठ और क्षेत्रीय पत्रकारों से जुड़ा हुआ है, जिनकी मान्यता रद्द होने के बाद पत्रकारिता से जुड़ी आजीविका और पेशेवर पहचान पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मान्यता निरस्तीकरण पर बढ़ा विवाद
राज्य सरकार की ओर से जारी कार्रवाई के बाद प्रभावित पत्रकारों ने चिंता जताई है कि मान्यता रद्द होने से उनके काम पर सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि वर्षों से क्षेत्रीय पत्रकारिता में काम कर रहे कई पत्रकारों के लिए यह फैसला बड़ा झटका है।
पत्रकारों के अनुसार, मान्यता खत्म होने से सरकारी कार्यक्रमों की कवरेज, सूचना तक पहुंच और समाचार संकलन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
विधानसभा में उठेगा मुद्दा
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद यह मामला अब विधायी चर्चा का विषय बन गया है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दे सकती है और प्रभावित पत्रकारों की समस्याओं पर विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री से न्याय की अपील
मामले को उठाने वाले पक्ष ने राज्य के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami से अपील की है कि वह इस मामले का गंभीर संज्ञान लें।
अपील में कहा गया है कि पत्रकारों की समस्याओं का समाधान करते हुए उनकी मान्यता पर न्यायसंगत और पारदर्शी निर्णय लिया जाए, ताकि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और गरिमा बनी रहे।
पत्रकार संगठनों का समर्थन
इस मुद्दे पर राज्य के कई पत्रकार संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों का कहना है कि सरकार को पारदर्शी जांच कराकर उचित निर्णय लेना चाहिए।
उनका मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सैकड़ों पत्रकारों और उनके परिवारों पर आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल यह मामला आगे चलकर कैबिनेट स्तर तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है।



